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इंदिरा गांधी : इंदिरा गांधी पर कविता, इंदिरा गांधी पर विशेष कविता, Indira Gandhi kavita hindi, poem on Indira Gandhi in hindi

  भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी एकमात्र ऐसी पहली और आख़िरी महिला प्रधानमंत्री थीं जिन्हें लौह महिला के नाम से पूरी वैश्विक दुनिया मे जाना जाता था। हिंदुस्तान इंदिरा गांधी के अतुल्य योगदान को कभी नहीं भुला सकता। मेरी यह कविता उनके अमिट योगदान के नाम समर्पित है। इंदिरा गांधी पर कविता जिसको दुनिया

मंच संचालन स्क्रिप्ट- संगीत संध्या । Anchoring script-musical night

  -नमस्कार दोस्तो, संस्कारधानी कला परिषद् द्वारा होली मिलन के सुअवसर पर आयोजित इस सुरों से गुनगुनाती हुई शाम में मैं अमित ‘मौलिक’ आज के कार्यक्रम के अतिथि गण, विशिष्ट जन एवम आप सब संगीत प्रेमियों का बहुत बहुत स्वागत करता हूँ-एहतराम करता हूँ । आज की इस सुरीली शाम को सुर बद्ध करने वाली

कविता -सती सीता की व्यथा/Kavita -sati Seeta ki vyatha

          आज मैं गाऊँ एक कहानी सच्ची तुम्हें सुनाऊं  थी राजकुमारी एक पिता मिथलेश शील और त्याग की गाथा गाऊँ सीता था उसका नाम गुणों की खान, थी सुन्दर उसकी काया थी रूप की चर्चा दूर बुद्धि भरपूर, थी धरती माता उसकी जाया   ये भी पढ़ें: गंगा नदी पर कविता

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उड़ती बात में आपका स्वागत है..

  जब दिल किसी विषय पर संवेदना से भर जाता है जब किसी बात पर चुप रहना पड़ जाता है जब दिल को कोई बात सच्ची लगती है जब खुद से मुलाक़ात अच्छी लगती है तब शमां जलानी नहीं पड़ती तब कविता बनानी नहीं पड़ती कविता तो स्वयं बन जाती है दबे ज़ज़्बात कह जाती

कविता दोहे-हमजोली/kavita dohe-hamjoli

बूढ़ा पेड़ कनेर का,  पनघट के था पास रोज़ सबेरे मिलन की, करते थे हम आस   मुट्ठी भर के दूब ली, फूल चमेली तीन भेंट में दे के हो गये, बातों में तल्लीन   लोहडी का मेला गये, मंगल का बाजार काका जी की गोलियाँ, भूल गये हो यार   इमली पत्थर पीस के, चटखारे छै सात
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