पौराणिक कवितायें Archive

श्री गणेश वंदना । Shri Ganesha vandana

मंगलम मंगलमयी वरदान दो शुभसदन शुभ हो सदा शुभ गान दो दहशतों की गर्द में सब ज़र्द हैं अमन वाली हर सुबह हर शाम दो चाहतों से कम मिले कुछ गम नहीं हमनिवाला हर कदम इंसान दो शंक ना भय रंच ना कोई पंक ना द्वन्द दंभों से परे ये ज़हान दो हम ना चाहें

भगवान बाहुबली पर कविता। Bhagwaan bahubali Hindi Poem

  स्वर्गों का सुख धन राज पाट, ऐश्वर्य ना मन को भाया था निज भ्रात लड़ें पद लिप्सा में, ऐसा मद रास ना आया था सब जीत गये मन हार गए, नश्वरता से मुख मोड़ लिये फिर बाहुबली ना रहे प्रभु, सुख रूप हुये सुख धाम भये निश्चय से धन्य-धरा-युग है, जो श्रवण बेल गोला

कविता -सती सीता की व्यथा/Kavita -sati Seeta ki vyatha

          आज मैं गाऊँ एक कहानी सच्ची तुम्हें सुनाऊं  थी राजकुमारी एक पिता मिथलेश शील और त्याग की गाथा गाऊँ सीता था उसका नाम गुणों की खान, थी सुन्दर उसकी काया थी रूप की चर्चा दूर बुद्धि भरपूर, थी धरती माता उसकी जाया   ये भी पढ़ें: गंगा नदी पर कविता

गंगा नदी पर कविता/Ganga nadi par kavita

  कैसे पावन गँगा का इस धरती पर अवतरण हुआ कैसे थे वो भागीरथ परमार्थ का ऊँचा गगन छुआ  इक्ष्वाकु कुल के वंशज श्री राम के विरले पूर्वज थे परम प्रतापी सगर नाम के राजा एक अपूरब थे  दिकशासन की इच्छा थी मैं चक्रवर्ती सम्राट बनूं क्यों ना अश्वमेघ करवाऊं कुल शासन जयवन्त करूं  हुआ

कविता- ‘कृष्ण मेरे आओ’/Kavita- ‘Krishna mere aao’

  वह कदम्ब का पण स्पंदन, सावन सी छाया वह पुष्पों के कुंज निकुँजों, की मनभावन माया। वह जमुना का अमृत सा जल, लहर लहर बंतियाँ वह बौराई अनुपम सुन्दर, गोकुल की सखियां। ◆ये भी पढ़ें-बरसाने के अद्भुत दोहे भले नहीँ वो युग आये पर, आप चले आओ हो सम्भव तो पुनः धरा पर, कृष्ण