देश भक्ति की कवितायें Archive

Deshabhakti shayari । तिरंगे की शायरी । तिरंगे पर चार लाइन शायरी । 15 अगस्त की शायरी । स्वन्त्रता दिवस पर चार लाइन शायरी

वतन की आन बान शान बहुत प्यारी थी ये वंदे मातरम की तान बहुत प्यारी थी। तुम्हारी आँख के आँसू उन्हें चढ़ा देना जिन्हें तिरंगे की मुस्कान बहुत प्यारी थी।। कोई आकर गले लगाये बहुत अच्छा है। शराफतों से पेश आये बहुत अच्छा है हमें न आँख दिखाना की फोड़ देंगें हम कोई गफ़लत न

पाकिस्तान सेना द्वारा दो भारतीय सैनिकों को मारने और उनके सिर काटने पर आक्रोश जताती कविता। Poem against Pakistanis army barbaric act killed two Indian soldiers and mutilated Bodies

    एक कटेगा बीस काटकर, दुश्मन के सिर लायेंगे हमें जिताओ है वादा हम, कड़ा सबक सिखलायेंगे। लेकिन आज नदारद सारे, तेवर भगतसिंह वाले ये कैसी तासीर पदों की, स्वाभिमान को जो मारे। निंदा निंदा और भर्त्सना, सुना सुना कर छका दिये बड़ बोले कुछ नेताओं ने, कान हमारे पका दिये। ये भी पढ़ें- 

कश्मीर में सैनिकों का थप्पड़ों द्वारा अपमान पर रोष जताती कविता। Poem against army being insulted in Kashmir

  गर न भूले आसमान से, ऊंचे उड़े इरादों को गर न भूले ढेर प्रचारित, छप्पन इंची वादों को। अगर याद हो सौ करोड़ ने, तुमको शासन सौंपा है अगर ज्ञात हो हिन्दोस्तां को, तुम पर बड़ा भरोसा है। जननी जन्मभूमि की अस्मत, हमको जां से प्यारी है अगर याद हो आंख नोचने, वाली रीत

कश्मीर में सेना के जवानों से हुई बदसलूकी पर आक्रोश जताती कविता। Poem against Indian army being insulted in Kashmir by some kashmiris.

  नहीं है पहनी चुड़ियाँ हमने, रण कंकण बाँध के रखते है। देश के सम्मान के खातिर, नरमुंड तैय्यार भी रखते है।। वीर सिपाही हम बाजू में आग, सीने में फौलाद रखते है। हम निडर प्रहरी भारत माता के, चरणों का मान रखते है।। ये भी पढ़ें-देशभक्ति की कविता ये भी पढ़ें-पद्मावती विवाद पर कविता

देशभक्ति पर एक बहुत ही ओजमयी कविता । Deshbhakti par kavita

नव प्रभात की नई रोशनी, में इक दीप जलाया हूँ शाम तलक कुछ फुंकारों से, लावा इसे बनाया हूँ। फफक उठे हैं-दहक उठे हैं, लाल फुलङ्गे सीने में हमको प्यारे रास ना आया, ऐसे घुट-घुट जीने में। कलम चली है-कलम चलेगी, हलके में मत लेना जी खुल के जब तलवार चलेगी, फिर इलज़ाम ना देना

देश भक्ति की शायरी । Desh bhakti ki Shayari

इक दीप जलाकर कर श्रद्धा का भीगी भीगी सी अंखियाँ कुछ कुछ विनत भाव कुछ ह्रदय चाव आज़ाद पार्क क़ुछ जलियाँ कुछ बिस्मिल का दिल मन भगतसिँह रग-रग में राजगुरु हों कुछ आओ कर लें उस जज़्बे को अर्पित फूलों की कलियाँ कुछ। इक चमक ताब इक मदहोशी, हर आलम चंगा होता है इक हूक

कैशलेस भारत पर कविता। poem on cashless india

  दुनिया के इस नील गगन में, सूरज हिंदुस्तान बने काम करो कुछ ऐसा यारो, दुनिया हमें सलाम करे। रही चुनौती की बातें तो, वो आतीं हैं आयेंगीं धूप खिलेगी दिन निकलेगा, परछाई भी छायेंगीं हमने पहले ही प्रयास में, मंगल यान उड़ाया है घर की परमाणु पनडुब्बी, का डंका बजवाया है। तकनीकी स्टार्टअप वाले,

मन की बात पर कविता । Poem on Man ki baat ।

‘मन की बात’ सत्य हो जाये, ऐसा इक परिवेश बने नेता जब नंबर वन अपना, देश भी नंबर एक बने यही है मौका आंगे आओ, मिल जुल ऐसा काम करो विश्व गुरु कहलाने वाला, फिर से भारत देश बने चाहे जितना भी तप कर लो, शिव संभू क्या कर लेंगे किया धरा सब अपनों का

नोट बंदी के विरुद्ध भारत बंद पर कविता। Not bandi ke viruddh Bharat band par Kavita

 बेईमानों ने तुरही फूकीं, मिल करके हुड़ दंग करो ज़हर फ़िज़ाओं में घुलवा दो, आओ भारत बंद करो गीदड़ चंद इकठ्ठे होकर, हुआ हुआ चिल्लाते हैं शेर बड़ा भारी है इसका, हुक्का पानी बंद करो। जनता खूब समझती है ये, किस प्रकार की बेचैनी नोटों की माला टूटी है, पीर घाव की है पैनी हाथी

काले धन पर बैन पर कविता। नोट बंदी पर कविता। मोदी जी का 09/11 पर कविता। poem black money banned in India

नोट बंद क्या हुए देश में राम राज्य सा आया जी मज़ा आ रहा, मज़ा आ रहा, मज़ा आ रहा भैया जी। हैं अवाक से देश के दुश्मन उग्रवाद के ठेकेदार सौ सुनार की एक लुहारी खूब करारी है ये मार कालेधन की शह पाकर के आतंकी गुर्राते थे नकली नोट छापने वाले हमको आँख