गीतकार अमित जैन मौलिक – सुनिये गीतकार अमित जैन मौलिक को गाडरवारा कवि सम्मेलन के मंच पर

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नमस्कार दोस्तों गीतकार अमित जैन मौलिक , आपका मित्र आप सभी का स्नेहिल अभिवादन करता है। मित्रों मुझे खेद है कि अब मैं उड़ती बात को उतना समय नहीं दे पा रहा हूँ जितना कि देना चाहिए। दरअसल कुछ अन्य व्यवसायिक गतिविधियों के साथ साथ मंचीय कार्यक्रम भी करना आरंभ किये हैं।

आप सबकी दुआओं का ही परिणाम है कि कवि सम्मेलनों में भी मुझे श्रोताओं की भरपूर मोहब्बत मिल रही है और मैं उत्तरोत्तर आंगे बढ़ रहा हूँ। उम्मीद है कि किसी दिन आपके ही शहर में- गाँव में आपसे रूबरू होने का सुअवसर मिलेगा।

मेरे इस वीडियो को देंखें और मुझे अपनी वैसी ही मोहब्बत दें जैसी कि उड़ती बात को दी है।

मिलते हैं शीघ्र ही आपके शहर में। आपकी कर्मभूमि पर, मोहब्बत से भरे कुछ नग्मों के साथ। इन स्वरचित पंक्तियों के साथ विदा लेता हूँ कि

उंगलियां जोड़ीं मिलाया हाथ, रिश्ता हो गया
हक़ जमाया बात मानी, मन फ़रिश्ता हो गया
अब कहाँ मासूमियत वो, जो कराये दोस्ती
हैसियत क़द और रुतबे, का तज़ुर्बा हो गया।

– अमित जैन मौलिक

 

सभी को सप्रेम अभिवादन

आपका
गीतकार अमित जैन मौलिक

 

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