शिक्षक दिवस पर आयोजन की सूचना ड्राफ्ट । शिक्षक दिवस का आमंत्रण पत्र । Shikshak divas par aayojan ka draft

  कबीरा ते नर अंध है, गुरु को कहते और  हरि रूठे गुरु ठौर है,  गुरु रूठे नही ठौर    प्रिय स्वजन,    यह सर्व विदित है कि वेदों एवम सनातन धर्म के अनुसार भारतवर्ष की प्रथम एवम प्राकृत भाषा संस्कृत थी जिसे देवोपुनीत भाषा भी कहा जाता है. संस्कृत से ही सुसंस्कृत शब्द की

सामूहिक तीर्थ यात्रा की सूचना लेख/Samuhik teerth yaatra ki suchna ka draft

“चलो करें हम तीर्थ वन्दना, अवसर बड़ा महान है  जहाँ जीव को मिले शान्ति, वही तीर्थ स्थान है”   प्रिय भक्तजनों,    प्रेम और सौहार्द्र का प्रतीक होली के सतरंगी महापर्व में अगर अपने इष्ट की भक्ति का पावन रंग का अमृत तुल्य  मिश्रण हो जाये और उस अमृत तुल्य मिश्रण की फुहार हम पर

श्री महावीर जयंती के आयोजन का सूचना ड्राफ्ट/Shri Mahaveer jayanti ke aayojan ka suchna draft

  बिघ्नो का नाश होता है महावीर नाम से निर्भय बनो और जय कहो श्री वीर प्रभु की सब मिल के आज जय कहो श्री वीर प्रभु की मस्तक झुका के जय कहो श्री वीर प्रभु की   स्नेहीजनों,    जैसा कि आप सबको विदित है कि प्रतिबर्षानुसार इस वर्ष भी युग नायक, देवों के

अध्यक्षीय भाषण ड्राफ्ट/Adhykshiya Bhashan draft

    हमारे संचालक द्वय………………….जी और……………………जी को बहुत बहुत धन्यवाद। मंचासीन गण मान्य विभूतियों को समर्पित इन चार पंक्तियों के साथ मै अपनी बात शुरु करना चाहूंगा कि.  .    ‘कहाँ हैं ऐसे लोग जो निस्पृह रण में जूझने जाते हैं परहित में निजहेतु त्यागकर प्यार बाँटते जाते हैं आशाओं के पुष्प पल्लवित होते इन्हीं मालियों

होली मिलन कार्यक्रम का आभार भाषण-3/Holi milan karykram ka aabhar bhashan

‘ श्याम सलोने राधा गोरी बरसाने का हुल्लड़ था रंग रंगीले फगुआ होली शहरों वाला अल्हड़ था जब रंग बरसा झूम गये सब धूम मची थी नगरी में भक्त मगन थे पी के नाचे अमृत वाला कुल्हड़ था   अभी तक एक स्वप्न सा प्रतीत होता है कि होली मिलन का कार्यक्रम इतना अभिनव एवम

जैनों के महामस्तकाभिषेक एवम वार्षिक मेला का आमंत्रण/Jaino ke mahamastkabhishek evam varshik mela ka amantran draft

‘श्री शांतिनाथ भगवान का मस्तकाभिषेक  धन्य धन्य वो लोग जो आकर माथा रहे हैं टेक’  भेड़ाघाट में परम पवित्र सरयू नर्मदा की शीतल लहरों का अविरल प्रवाह जब अपने सम्पूर्ण वेग से धुंवाधार प्रपात से धरती तल पर गिर कर सहज हो जाता है  तो ऐसा प्रतीत होता है जैसे नर्मदा नदी उमंग में बहती

सामूहिक उत्सव या टिफ्फिन पार्टी/ Samuhik utsav ya tiffin party

रंगो को थिरकते हुये सपनों  को महकते हुए पियूष छलकते हुये सौगातें दमकते हुए अपनों को चहकते हुए आनंद बरसते हुए सब देखेंगे सभी चलेंगे सभी चलेंगे सब देखेंगे  ख़ुश्बूओ की लड़ाई होगी मनुहारो की बौछार होगी व्यंजनों की लड़ाई होगी चटओरी मैया की जयकार होगी गटपट का उद्धार करेंगे सब देखेंगे सभी चलेंगे  सभी

रोमांटिक कविता – हुनर/ Romantic poem-hunar

      हुनर        वाह दोस्त  तेरे हुनर के क्या कहने  जब चाहो  जिसकी चाहो  जितनी चाहो  उतनी  पतंग उड़ाओ  ये लाओ  वो लाओ  ये गाओ  वो सुनाओ  हवा चलाओ  आस्मां बनाओ  और  मन भाये तो  ठीक  मन चाहे तो  हाथ छोड़ दो  डोर तोड़ दो  पँतग मरोड़ दो..    ये भी पढ़ें: मुहब्बत का गीत।

कविता-कैक्टस/kavita-Kaiktas

कभी कभी चिंतायें कैकटस हो जाती है नुकीली चुभतीं सी कष्टप्रद पीड़ादायक संताप के रंग में रंगी हुईं स्वतः ही पल्लवित होतीं जाती हैं प्रथम दृष्ट्या ऐसा प्रतीत होता है जैसे, इनका जन्म अकारण ही होता है ये बिन बताये ही आती हैं कदाचित, दृष्टि परिपूर्ण नहीँ है  किंचित रुप से, परिस्थितियाँ वैयक्तिक हो सकती

कविता दोहे-हमजोली/kavita dohe-hamjoli

बूढ़ा पेड़ कनेर का,  पनघट के था पास रोज़ सबेरे मिलन की, करते थे हम आस   मुट्ठी भर के दूब ली, फूल चमेली तीन भेंट में दे के हो गये, बातों में तल्लीन   लोहडी का मेला गये, मंगल का बाजार काका जी की गोलियाँ, भूल गये हो यार   इमली पत्थर पीस के, चटखारे छै सात