जैनों के महामस्तकाभिषेक एवम वार्षिक मेला का आमंत्रण/Jaino ke mahamastkabhishek evam varshik mela ka amantran draft

‘श्री शांतिनाथ भगवान का मस्तकाभिषेक  धन्य धन्य वो लोग जो आकर माथा रहे हैं टेक’  भेड़ाघाट में परम पवित्र सरयू नर्मदा की शीतल लहरों का अविरल प्रवाह जब अपने सम्पूर्ण वेग से धुंवाधार प्रपात से धरती तल पर गिर कर सहज हो जाता है  तो ऐसा प्रतीत होता है जैसे नर्मदा नदी उमंग में बहती

सामूहिक उत्सव या टिफ्फिन पार्टी/ Samuhik utsav ya tiffin party

रंगो को थिरकते हुये सपनों  को महकते हुए पियूष छलकते हुये सौगातें दमकते हुए अपनों को चहकते हुए आनंद बरसते हुए सब देखेंगे सभी चलेंगे सभी चलेंगे सब देखेंगे  ख़ुश्बूओ की लड़ाई होगी मनुहारो की बौछार होगी व्यंजनों की लड़ाई होगी चटओरी मैया की जयकार होगी गटपट का उद्धार करेंगे सब देखेंगे सभी चलेंगे  सभी

रोमांटिक कविता – हुनर/ Romantic poem-hunar

      हुनर        वाह दोस्त  तेरे हुनर के क्या कहने  जब चाहो  जिसकी चाहो  जितनी चाहो  उतनी  पतंग उड़ाओ  ये लाओ  वो लाओ  ये गाओ  वो सुनाओ  हवा चलाओ  आस्मां बनाओ  और  मन भाये तो  ठीक  मन चाहे तो  हाथ छोड़ दो  डोर तोड़ दो  पँतग मरोड़ दो..    ये भी पढ़ें: मुहब्बत का गीत।

कविता-कैक्टस/kavita-Kaiktas

कभी कभी चिंतायें कैकटस हो जाती है नुकीली चुभतीं सी कष्टप्रद पीड़ादायक संताप के रंग में रंगी हुईं स्वतः ही पल्लवित होतीं जाती हैं प्रथम दृष्ट्या ऐसा प्रतीत होता है जैसे, इनका जन्म अकारण ही होता है ये बिन बताये ही आती हैं कदाचित, दृष्टि परिपूर्ण नहीँ है  किंचित रुप से, परिस्थितियाँ वैयक्तिक हो सकती

कविता दोहे-हमजोली/kavita dohe-hamjoli

बूढ़ा पेड़ कनेर का,  पनघट के था पास रोज़ सबेरे मिलन की, करते थे हम आस   मुट्ठी भर के दूब ली, फूल चमेली तीन भेंट में दे के हो गये, बातों में तल्लीन   लोहडी का मेला गये, मंगल का बाजार काका जी की गोलियाँ, भूल गये हो यार   इमली पत्थर पीस के, चटखारे छै सात

रोमांटिक शायरी ‘दिल तोड़ना’ । Romantik Shayri ‘Dil todna’

बातो-बातों में मुँह मोड़ना आ गया  हाथ मझधार में छोड़ना आ गया  इससे ज्यादा मुझे और क्या सीखना  प्यार में आज दिल तोड़ना आ गया  इस शहर में नहीँ गाँव में ले चलो  पंख ना खोलना पाँव में ले चलो  तुम मेरी आँख में डूब जाना वहीँ  आम के पेड़ की छाँव में ले चलो  वक़्त

कविता-कल की खातिर/kavita-kal Ki khatir

अनगढ़ सपनों की खातिर  सुख चैन झोंकते जाते हो  कल की खातिर वर्तमान का  गला घोंटते जाते हो!     जो बीता बो बृस्मित कर दो  याद ना करना मत ढोना  चाहे बिष था या अमृत था  ना खुश होना-ना रोना  इक इक पल का लुफ़्त उठाओ  यह क्षण लौट ना आयेगा  आज जिसे तुम

ग़ज़ल ‘रंगत’/Gazal ‘Rangat’

ग़ज़ल तेरे रुख़सार की रंगत गुलाब देखेंगे  छलकता नूर सुबह शाम आब देखेंगे    इक यही ख्वाब है दीदार तेरा हो जाये  हमें हक है कि हम भी माहताब देखेंगे   मैं जिद भी करता हूँ तो एक बार करता हूँ  तुम्हे मिलता या हमें आफ़ताब देखेंगे  हमारे इश्क को ‘मौलिक’ मजाक ना समझो  वो हम ही

गीत ‘किसके लिये’/Geet ‘kiske liye’

            गीत  तेरी मेहरबानी किसके लिये  तेरी कदरदानी किसके लिये  कोई तो होगा मीत तेरा  शाम सुहानी किसके लिये   बात नहीं कुछ आस नहीं कुछ  खोने को अब पास नहीं कुछ  यूँ ही परेशां रहता हूँ मैं तो  तुझसे मुहब्बत ख़ास नहीं कुछ प्रेम कहानी किसके लिये ये मनमानी किसके लिये  कोई

देश भक्ति कविता ‘सर्जिकल स्ट्राइक’/ Desh bhakti kavita on ‘Surgical Srike’

  शेरों सी हुंकार हुई है, तब जा के जयकार हुई  दुश्मन को जब जब ललकारा, तब तब उसकी हार हुई  अब ना कोई रोशनी चाहिये अब तो सूरज ले लेंगे  लहरों से भिड़ जायेंगे हम अंगारों से खेलेंगे  थर-थर कापेंगा अब दुश्मन ली हमने अंगड़ाई है  गला काट देंगे हम छल का सच की
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