Deshabhakti shayari । तिरंगे की शायरी । तिरंगे पर चार लाइन शायरी । 15 अगस्त की शायरी । स्वन्त्रता दिवस पर चार लाइन शायरी

देशभक्ति शायरी – Deshabhakti shayari । तिरंगे की शायरी । तिरंगे पर चार लाइन शायरी ।

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देशभक्ति शायरी – दोस्तों, आप सभी को जय हिंद। आपके सामने प्रस्तुत है उड़ती बात special देशभक्ति शायरी एवम तिरंगा शायरीदेशभक्ति गीतों की मंचीय प्रस्तुति में भी इस देशभक्ति शायरी का प्रभावी प्रयोग किया जा सकता है। अपनी अमूल्य प्रतिक्रिया से अवश्य अवगत करायें।

देशभक्ति शायरी

देशभक्ति शायरी

वतन की आन बान शान बहुत प्यारी थी
ये वंदे मातरम की तान बहुत प्यारी थी।
तुम्हारी आँख के आँसू उन्हें चढ़ा देना
जिन्हें तिरंगे की मुस्कान बहुत प्यारी थी।।

कोई आकर गले लगाये बहुत अच्छा है।
शराफतों से पेश आये बहुत अच्छा है
हमें न आँख दिखाना की फोड़ देंगें हम
कोई गफ़लत न पालना तो बहुत अच्छा है।

डराते हैं ना किसी को न कभी डरते हैं
राम का नाम लिया मस्त सभी रहते हैं।
हमारी ओर ना अपनी बुरी नज़र रखना
की हम गुस्ताखियों को माफ़ नहीं करते हैं।

उत्तर में तुंग हिमालय हो, हिम से बहती इक गंगा हो
ज़न्नत हो काश्मीर जैसा, अद्भुत अखंड नालंदा हो।
हे ईश्वर जन्म दोबारा दो, तो भगतसिंह सुखदेव बनूँ
बस वतन हो हिंदुस्तान मेरा, हाथों में यही तिरंगा हो।।

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देशभक्ति शायरी

स्वराज्य जान से प्यारा है, इक बार ज़रा नारे कह लो
लक्ष्मीबाई आज़ाद बनो, नस नस में हुंकारें भर लो।
यह आन हमारी बनी रहे, आओ ऐसा संकल्प करें
जब शान तिरंगा है अपना, तो जान तिरंगा भी कर लो।

क्या चीन हमारा कर लेगा, क्या पाकिस्तान बिगाड़ेगा
हम अगर ठान लेंगें मित्रो, नज़रों में खौफ़ समायेगा।
बस हिन्दू सिक्ख मुसलमा से, हम हिंदुस्तानी हो जायें
फिर जो हमसे टकरायेगा, वह चूर चूर हो जाएगा।

निंदा की लफ़्फ़ाज़ी छोड़ो, लफ़्ज़ों में चिंगारी भर लो
दुश्मन ने आँख तरेरी है, इक निर्णय इस बारी कर लो।
लातों के भूत कहाँ सुनते, बातों का जमा खर्च छोड़ो
दुश्मन को मज़ा चखाने दो, अब रण की तैयारी कर लो।।

गद्दारों का क्यों ज़िक्र करें, थे मुग्ध ज़हर को पीने में
बस अपने लिये जिये जी भर, धिक्कार है उनके जीने में
जो लहू वतन का हो न सका, वह लहू नही है पानी है
हम गीत गायेंगे उनके जो, गोली खाते थे सीने में।।

हम अमर शहीदों की ख़ातिर, आँखों को गंगा कर लेंगे।
ईमान तिरंगा कर लेंगें, दिल जान तिरंगा कर लेंगें।

इस भागदौड़ के जीवन को, थोड़ा सा ठहराकर देखो
हाथों में एक तिरंगा लो, तुम ऊँचा फहराकर देखो।।

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