15 अगस्त शायरी – इंडिपेंडेंस डे शायरी, देशभक्ति शायरी, 15 अगस्त पर शायरी, वतनपरस्ती शायरी

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15 अगस्त शायरी – जय हिन्द दोस्तो। मैं कवि अमित जैन मौलिक आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की अग्रिम बधाई प्रेषित करता हूँ। देश में ख़ुशी का माहौल है। धारा 370 और 35A से छुटकारा तो जम्मू काश्मीर को मिला लेकिन ख़ुशी पूरे देश ने मनाई। हमारी पीढ़ी ने मानो आज़ादी मिलने की एक झलक देख ली। इस बार आज़ादी का ज़श्न दोगुनी ख़ुशी लेकर आया है।

इस अवसर पर यह आर्टिकल 15 अगस्त शायरीइंडिपेंडेंस डे शायरी, देशभक्ति शायरी, 15 अगस्त पर शायरी, वतनपरस्ती शायरी आप सबके समक्ष प्रस्तुत है। आपकी सबकी जानकारी के लिये बता दूँ कि उड़ती बात पर प्रकाशित प्रत्येक आर्टिकल कविता, ग़ज़ल, शायरी, एंकरिंग स्क्रिप्ट आदि मेरा स्वरचित होता है। तो चलिए पढ़ते हैं यह आर्टिकल 15 अगस्त शायरी

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15 अगस्त शायरी

कहीं है तेज़ हवायें, कहीं सैलाब उठा
तबाही बेहिसाब, मन ख़राब करती है
तरक़्क़ी ख़ूब हुई, थपथपाईं हैं पीठें
किसे ख़बर थी कि, कुदरत हिसाब करती है।

( बाढ़ और सैलाब पर शायरी )

फणीशों के हलाहल में, विपिन बादाम का डूबा
तिज़ारत करके बैठे हैं, रेहन में रख दिया सूबा
ज़हर उगला जो तुमने, याद आई मीर जाफ़र की
हुआ घोषित मिली इमरान को, अब मुफ़्त महबूबा।

( महबूबा मुफ़्ती पर शायरी )

करो कब्ज़े में हर हिस्सा, जो हमसे वक़्त ने छीना
उड़ो लाहौर तक वीरो, लहू इमरान का पीना
इकाई इंच की रखना, हो हमला अब दहाई तक
दिखा दो नाप कर के आज, छप्पन इंच का सीना

( नरेंद्र मोदी पर शायरी, इमरान पर शायरी,
छप्पन इंची सीने पर शायरी )

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सुना था आज देखा, सिंह ना करते कभी क्रंदन
खड़े बेख़ौफ़ असुरों में, लगाकर रक्त का चंदन
निडरता आपकी देखी, तो आई याद अंगद की
तुम्हारे शौर्य साहस धैर्य का, वंदन है अभिनंदन।

( अभिनंदन पर शायरी )

बदलते हिंद का तुमसे हुआ, अनुमान अभिनंदन
बने हो तुम हमारी जीत का, प्रतिमान अभिनंदन
तुम्हारी ढाई दिन में वापिसी ने, कह दिया सबकुछ
है दहशत में वो दहशतगर्द, पाकिस्तान अभिनंदन।

( अभिनंदन पर शायरी )

उन्हेँ देती है कुदरत थपकियाँ, छाया करे अंबर
उन्हें ना चाहिये दीवार छत, ना मखमली बिस्तर
मिला तो खाये सब छककर, नहीं तो पी लिये पानी
जहाँ माँ ने सुलाया सो गये, बेटे वहीँ थककर।

( सैनिकों पर शायरी, भारतीय सैनिकों पर शायरी,
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ठहाके जो लगाते हैं, शहीदों की शहादत पर
संपोले हैं – पनप उट्ठे, हमारी आस्तीनों में
बने विषबेल उग आये, ये पत्थरबाज क्यारी में
करो पहले दफ़न इनको, भरो बारूद सीनों में।

( पत्थरबाजों पर शायरी )

तुम्हीं ने आस्तीनों से, बड़े विषधर निकाले हैं
तुम्हीं ने सरपरस्ती दी, पिलाये दुग्ध प्याले हैं
ज़हर से भर गई गँगा, तो रोते हो कहाँ जायें
करो विषपान मर जाओ, तुम्हीं ने नांग पाले हैं।

( देश के गद्दारों पर शायरी, जयचंदों पर शायरी )

भुलाकर मज़हबी झंडे, तिरंगा शान हो जाये
सियासत क़ौम की छूटे, वतन ईमान हो जाये
तो ये सब चीन पाकिस्तान जैसे, चिल्लरों में हों
अगर हर शख़्स के दिल में जो, हिंदुस्तान हो जाये।

( वतनपरस्ती शायरी, तिरंगा शायरी, वतन पर शायरी,
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उठाई तेग ना होती, सलामी कर रहे होते
हिलाकर दुम उन्हीं की, हाँ में हामी भर रहे होते
जो सत्तावन में रानी, बन भवानी ना लड़ी होती
अभी तक हम फ़िरंगी की, ग़ुलामी कर रह होते।

( रानी लक्ष्मीबाई पर शायरी, झाँसी की रानी पर शायरी )

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फ़दाली कर रहे हैं रोज निंदा, बात कुछ होगी
अकेले उड़ रहा ‘मौलिक’ परिंदा, बात कुछ होगी
ठगी के दौर में बेईमानियों के, बीच में रह के
किसी में अब भी है ईमान ज़िंदा, बात कुछ होगी।

( नरेंद्र मोदी पर शायरी, मोदी जी पर शायरी )

 

छोड़ो जी मलाल रुत आई है बसंत वाली
मल दो गुलाल लाल सातों आसमान पर
भारती के लालों ने किया है काम बेमिसाल
आज रंग लाल हो मिराज की उड़ान पर
ताल ठोक छीन लिया मूँछ वाला लाल
काल बन झपटा था एफ16 से विमान पर
उनके नाम अभी तो गुलाबी करो गाल
जिन लालों ने गिराये बम दुष्ट पाकिस्तान पर।

( भारतीय वायुसेना पर शायरी, सेना पर शायरी )

सात दशक का बड़ा बवंडर, फूंक मार कर रोक दिया
मक्कारी की आँख में तड़का, लाल मिर्च का झोंक दिया
तीन सौ सत्तर के चक्कर में, दुनियां उलझी बैठी थी
और शाह ने पी ओ के पर, दावा अपना ठोक दिया।

( धारा 370 और 35A की समाप्ति पर शायरी,
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या तो फन कुचले जायेंगे, या विषदंत निकालेंगे
दूध पिलाया था नेहरू ने, अब तेज़ाब पिलायेंगे
नागपंचमी पर फ़तवा, मोटा भाई ने सुना दिया
विषधर केशर घाटी वाले, जमकर पूजे जायेंगे।

( धारा 370 और 35A की समाप्ति पर शायरी,
तीन सौ सत्तर पर शायरी, अमित शाह पर शायरी )

उम्मीद करता हूँ कि यह आर्टिकल 15 अगस्त शायरी आप सबको पसंद आया होगा। धन्यवाद । जय हिन्द

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