होली मिलन कार्यक्रम का आभार भाषण-3/Holi milan karykram ka aabhar bhashan

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श्याम सलोने राधा गोरी बरसाने का हुल्लड़ था
रंग रंगीले फगुआ होली शहरों वाला अल्हड़ था
जब रंग बरसा झूम गये सब धूम मची थी नगरी में
भक्त मगन थे पी के नाचे अमृत वाला कुल्हड़ था

 

अभी तक एक स्वप्न सा प्रतीत होता है कि होली मिलन का कार्यक्रम इतना अभिनव एवम रचनात्मक भी हो सकता है।

मुझे जब इस आयोजन के बारे में अवगत कराया गया था तो मुझे प्रसन्नता के साथ-साथ कुछ चिंताएं भी सताने लगी। ठीक होली के दिवस पर शहर से इतने बड़े समूह का प्रस्थान और धुलेंडी के दिन ही इतना बड़ा होली मिलन का यह सांस्कृतिक आयोजन एवम उसकी सारी समुचित व्यवस्थायें किसी भी दृष्टि से अन्य दिनों की तरह सहज नहीं थीं।

ट्रांसपोर्ट बंद होना, सभी प्रकार के बाज़ार पूर्णतया बंद होना, यहाँ तक की कामगार आदि की अनुप्लब्धता आदि ढेरों बातें बड़ी चुनोतियों की तरह थीं। लेकिन कहते हैं कि जब हम ठान ही लेते हैं तो रास्ते भी निकलते हैं। निश्चित रूप से ज़िद के आंगे ही जीत होती है।

एक योजनाबद्ध तरीके से की सभी श्रेणियों आवास व्यवस्था, भोजन व्यवस्था, परिवहन व्यवस्था, सांस्कृतिक समारोह आदि सभी चरणों को सफलतापूर्वक आयोजित करने के लिये आयोजकों को बहुत बहुत बधाई, निश्चित ही यह उनकी सूझबूझ, एक बड़े होमवर्क का ही सुखद परिणाम है।

ग्रुप के सभी सदस्यों का सहयोग, व्यवस्थाओं में उनकी उल्लेखनीय भूमिका एवम प्रत्येक आयोजन में उनकी उत्साहजनक भागीदारी के बिना इस कार्यक्रम में चार चाँद लगना संभव नहीँ था।

पूरी कार्यकारिणी एवम सभी सदस्यों को एक औऱ बड़े एवम अप्रतिम आयोजन को सफल बनाने के लिये बधाइयां ही बधाइयां. .

होली की पुनः मंगल कामनाएं. .

 

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