रोमांटिक गीत-ख़ुशामद । Romantic geet-khushamad । प्यार में तकरार की नज़्म । शिकवे शिकायत की नज़्म

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ख़्वाहिशें और थीं हाल हैं कुछ ज़ुदा
सूरतें किस्मतों की बदलती नहीं
थक गये हम दुआ मांगते मांगते
हाथ की कुछ लकीरें बदलती नहीं
हमने सुन लीं हैं ढेरों नसीहत
है गज़ब की तुम्हारी शरीयत
गर्क हो जायेंगे हम तुम्हारी कसम
बेरहम ये नजीरें बदलती नहीं
आपको आपकी साफगोई
क्या कहूँ हर दफ़ा आँख रोई
ये हुक़ूमत की तवियत मुबारक तुम्हें
ये करम ये नवाज़िश संभलती नहीं

 

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कितने दिन से नहीं चाँद रोया
कितने रातें नहीं नूर सोया
ये मुहब्बत की दुनिया है साहेब मेरे
यूँ ज़िरह की बिना पे ये चलती नहीं
हम सुबह से खड़े हैं वहाँ पर
फूल खुश्बू बनाते जहाँ पर
दिन गुलों की ख़ुशामद में मशरूफ़ था
शाम भी बिन इज़ाज़त के ढलती नहीं
किस तरह की ये रस्मी सजावट
किस तरह की नफ़ीसी दिखावट
तुम दरीचों पे मज़लिस सजा तो लिये
टोटकों से हक़ीक़त बदलती नहीं
*शरीयत-कानून, नियम
*गर्क-बरबाद
*नजीरें-उदाहरण, मिसाल
*साफ़गोई-सीधी और साफ़ बात कहना
*नवाज़िश-मेहरबानी करके उपहार देना
*ज़िरह-बहसबाज़ी
*ख़ुशामद-चापलूसी
*मशरूफ़-व्यस्त
*नफ़ीसी-पवित्र
*दरीचों-आँखों, नज़रों
*मज़लिस-महफ़िल, मेला, भीड़

ग़ज़ल-तसल्लियाँ

अब ये इत्मीनान ये तसल्लियाँ कहाँ से लाएं हम
अभी तो तुम आये हो अभी अभी जाने वाले हो
ख़्वाब ख्वाहिशें तिश्नगी हुजूम बना के आ गये हैं
लगता है कि आज दिल की बात बताने वाले हो
इतनी सुर्खियां बटोरना भी अच्छा नहीं मेरे साहेब
सुना है अब तुम आसमाँ सर पे उठाने वाले हो

 

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तुम्हारे पलकों से गिरे ये कतरे मेरी जान ना ले लें
और कितने इम्तिहान हैं कितना आजमाने वाले हो
ये कैसी सुगबुआहटें फैली हैं घर के चिरागों में
अफवाहें हैं कि तुम मेरा दिल जलाने वाले हो
अब हम भी कहाँ जाएँ रोज इन अंधेरों को लेकर
सुना है तुम हथेली पर सूरज उगाने वाले हो।

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