यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ पर हाहाकारी कविता । UP CM yogi adtiyanath par hahakaari Kavita

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अब भगवा कहो या केशरिया, सर चढ़कर के रंग बोला है
उत्तर ने उत्तर खोज लिया, यू पी योगी संग डोला है।

आवाम घरों से निकल पड़ी, यूपी भगवा रंगी कर दी
गुलफ़ाम ख़लीफ़ा जितने थे, तवियत उनकी चंगी कर दी।

दुर्दिन दशकों के सुलग उठे, इक धुवाँ गगन पर छाया है
आक्रोश दिलों का फूट पड़ा, सैलाब धरा पर आया है।

चुपके से ताजमहल सिसका, यमुना का किनारा रोया था
तहज़ीब लखनवी रोई थी, सब गर्व अवध का खोया था।

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गंगा की लहरें विचलित थीं, गुलशन की बिगड़ी सूरत थी
घनश्याम राम की धरती पर, संतो की बड़ी ज़रूरत थी।

आख़िर कीचड में कमल खिला, खुश्बू फैली संगीत उठा
ऐसी केशरिया हवा चली, हाथी बौराया चीख उठा।

खुदगर्ज़ी के मनमर्जी के, सब महल कंगूरे टूट गये
मल्लों के शातिर दांव पेंच, सब मीलों पीछे छूट गये।

पंजे पे कसा शिकंजा तो, क्या हाथ पैर सब फूल गये
हुंकार भरी जब जनता ने, तो हिरन चौकड़ी भूल गये।

भोगी तो देख लिये सारे, अब योगी राज संभालेगा
पूरब तो पूरब उत्तर में, आदित्य गगन पर छायेगा।

मंसूबों और हौसलों का, पावन संयोग अनोखा है
मोदी योगी दो दीवाने, यह मिलन बड़ा ही चोखा है।

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सूरज होगा अब मुट्ठी में, रोली में उसे मिला लेंगें
भगवान राम के माथे पर, दिग्विजय का तिलक लगा देंगें।

बेबाक निडर मौलिक प्रचंड, बारूदों का इक ढेर मिला
कोइ ऐसा वैसा संत नहीं, यूपी को भगवा शेर मिला।

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