मीठे अहसास की कविता । Poem in falling Love । Poem in being Love । प्यार की कविता। मोहब्बत की कविता। पहले प्यार की कविता

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रोमांटिक कविता-उफ़ान

आतुरता का
व्याकुलता की ओर
यह प्रवाह
आह!!
गुमान ही ना था
कोई अनुमान ही ना था।
लज़्ज़त के गगन से
टप्प टप्प बूँद गिरती रही
हृदय के रजत कटोरे में
चुपके से, लबालब
चांदनी भरती रही।

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जब तंद्रा टूटी
तो देखा
विदीर्ण हो गई
किन्तु-परंतु की रेखा
जब होश आया तो देखा
पीयूष से भर गया घट
लहक उठा आलम
ख़यालों में था मन
अधखुले नयनों के
बंद ही न होते पट।
क्या छुआ
जो यूँ हुआ
ये वज़ूद तो
तने की तरह तना था
बेपरवाह लापरवाह
स्वयं में मुग्ध।
घट का पीयूष पिया
तो समझा
अब तक क्या जिया।
खुरदुरेपन में फूटे
नवीन अंकुर
निकल आईं शाखायें
अब मैं हरा भरा हूँ
हाँ एक जगह ही खड़ा हूँ,
लेकिन तुम थोड़ा और
उतंग करो अपना उफान
मैं छू लूंगा तुम्हारे तरंगित
अस्तित्व को,
झुक कर-झुकाकर
अपनी शाखायें,
हो जाऊँगा तरबतर।
उम्मीदें बढ गईं हैं
कि अब जी लूंगा
देर सवेर ही सही
मैं अमृत पी लूंगा।

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