फिल्म पद्मावती विवाद – Poem on film padmavati controversy in hindi, फिल्म पद्मावती विवाद पर कविता

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फिल्म पद्मावती विवाद – फिल्मकार संजय लीला भंसाली की फ़िल्म पद्मावती जो कि अब फ़िल्म पद्मावत के नाम से released हुई है, पर विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। एक बात तो तय है कि सती रानी पद्मिनी के चरित्र के फिल्मांकन में कुछ न कुछ मर्यादाओं का उलंघन हुआ है। अलाउद्दीन खिलज़ी की काली छाया से अपना सतीत्व बचाने के लिये रानी पद्मावती ने कई सारी महिलाओं के साथ जलती चिता में स्वयं की आहुति दे दी थी जिसे जौहर कहा गया। यह लोगों की आस्था का प्रश्न है। देश के राजपूताना वर्ग ही नहीं समूचे भारतवर्ष में रानी पद्मावती को आस्था और सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। फिल्म पद्मावती विवाद पर मेरी यह कविता सभी भारतवासियों के आक्रोश को आवाज़ देती है और उन फिल्मकारों को आगाह करती है जो देश की गौरव गाथाओं को व्यवसायिक दृष्टिकोण से दिखाने की होड़ में आस्था को ठेस पहुंचा रहे हैं। 

फिल्म पद्मावती विवाद

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संजय लीला भंसाली की फिल्म
पद्मावती विवाद पर कविता 

किस तरहा के कौन से मद में,
चूर अड़े हो बोलो तो
किस मिट्टी पर जन्म लिया है,
कहाँ खड़े हो तोलो तो।

खूब बने हो तरफदार तुम,
भांडों वाली जाती के
मुखिया बन बैठे हो जैसे,
ताली वाली थाती के।

केवल खिलज़ी मिला था तुमको,
महिमा मंडित करने को
वीर प्रतापी रतन सिंह का,
गौरव खंडित करने को।

जिसको सदा हिमालय झुकता,
नभ धरती पर आता है
जिसके जौहर की ओजस पर,
ईश्वर सुमन चढ़ाता है।

जिसने तपते अंगारों में,
जान की होली खेली थी
युग युग की सतियों पर भारी,
पद्मावती अकेली थी।

ऐसी रानी के सतीत्व पे,
तुमने कीचड़ छिड़का है
लगता है उद्दंड बड़ा तूँ,
लगता थोड़ा टिड़का है।

है चित्तौड़ साक्षी उनकी,
गर्वमयी कुर्बानी का
राजा रतन और पद्मा की,
अद्भुत प्रेम कहानी का।

तुम उन पर चल चित्र बनाते,
धन तुम पर बरसा देते
गौरव गाथा देश देखता,
नभ पर तुम्हें बिठा देते।

लेकिन ये षडयंत्र बड़ा है,
तिल तिल आंगे बढ़ने का
अकबर खिलज़ी की ज़मात की,
मोहक छवियाँ गढ़ने का।

देश जानता है सब बातें,
हलके में मत लेना जी
मचल उठीं तो टूट पड़ेगीं,
ढेरों करणी सेना जी।

डेढ़ सयाना ना बनना तुम,
डरो ज़रा कुछ घबराओ
गुस्से में हैं राजपूताना,
कदम खींच लो रुक जाओ।

तिक्का बोटी कर देंगे ये,
राजपूत सब बेदिल हैं
कौन कहाँ कितना मारेगा,
अंदाज़े भी मुश्किल हैं।

संजय लीला भंसाली ये,
मौलिक लीला बंद करो
खुद्दारी की धवल चूनरी,
पर ऐसे ना गंद करो।

 

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Hindi Poem on
Film padmavati controversy

kis tarha ke kaun se mad me,
choor ade ho bolo to
kis mittee par janm liya hai,
kahaan khade ho tolo to.

khoob bane ho tarafdaar tum
bhaando vaali jaati ke
mukhiya ban baithe ho jaise,
taalee vaalee thaatee ke.

keval khiljee mila tha tumko,
mahima mandit karne ko
veer prataapi ratan singh ka,
gaurav khandit karne ko.

jisko sada himaalay jhukta,
nabh dhartee par aata hai
jiske jauhar ki ojas par,
eeshvar suman chadhaata hai.

jisne tapte angaaron me
jaan kee holi kheli thi
yug yug ki satiyon par bhaari,
padmaavati akeli thi.

padma raani ke sateetva pe
Tumne keechad chhidka hai
lagta hai udand bada toon,
lagta thoda tidka hai.

hai chittaud saakshee unkee,
garv mayee kurbaanee ka
raaja ratan aur padma ki,
adbhut prem kahaanee ka

tum un par chal chitra banate
Dhan tum par barsa dete
gaurav gaatha desh dekhta
Nabh par tumhe bitha dete.

lekin ye shadyantra bada hai,
til til aange badhne ka
akbar khiljee ki zamaat ki,
mohak chhaviyaan gadhne ka.

desh jaanta hai sab baaten,
halke me mat lena jee
machal utheen to toot padegeen,
dheron karnee sena jee.

dedh sayaana na banna tum
daro zara kuchh ghabraao
gusse me hai raaj pootaana,
kadam kheench lo ruk jao.

tikka boti kar denge ye,
raaj poot sab bedil hain
kaun kahaan kitna maarega,
anjaaze bhi mushkil hain.

sanjay leela bhansaali ye,
maulik leela band karo
khudaari ki dhaval choonri,
par aise na gand karo.

 

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