अतिथि स्वागत शायरी/आभार शायरी । Guest Shayari/Gratitude’s Shayari

कौन कहता है कि रिश्तों में
जलन कड़वाहट बसती है
हमारे ग्रुप में आकर देखो
यहाँ केवल सौगात बटती है
कार्यक्रम को भव्य सफलता
दिलाकर आपने बता दिया है
कि हमारे दिलों में सिर्फ
और सिर्फ मोहब्बत बसती है।

हथेली पर सूरज उग आता है
सुना था आज देख लिया
उम्मीद मिल जाए तो मन हवा में
उड़ जाता है देख लिया
आप यहाँ पधारे, हमारे हौसलों को
तो पंख लग गये मानो
अच्छे इंसान के साथ कैसे
जहाँ जुड़ जाता है देख लिया।

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काश मेरे हाथ में होता
आसमान देने को मन करता है
सर झुक-झुक जाता है
इतना मान देने को मन करता है
आप लोगों ने बंजर जमीन पर
चन्दन उगा दिए मेरे दोस्तो
आपकी मेहनत लगन पर
दिलो जान देने को मन करता है।

 इस बस्ती से अलग ज़माने से ज़ुदा कह दें
अजब कहें अज़ीम कहें अलहदा कह दें
आपकी रहनुमाई के किस्से इतने मकबूल हैं
कि हमारी पेश चले तो हम आपको खुदा कह दें।

किसी हुकूमत की नहीं दिलों में बसने की चाह थी
लक्ष्य पहाड़ सा था पर अपनी टीम भी तो वाह थी
अँधेरा था चिराग ना थे हमने हौसले जला लिए
नूर के लिये कौन कितना जला किसको परवाह थी।

 

दिल डूब-डूब जाता था उम्मीद जगती ना थी
हथेली पर गुलाब खिला दें यूँ हमारी हस्ती ना थी
हम कैसे शुक्रिया आभार उपकार कहें आपका
अगर आप ना आते तो यह शाम महकती ना थी।

ऐ मेरे मालिक मुझे दिल से निकली दुआ बना दो
मुझे मोहब्बत से लबरेज कर दो क़ुछ जुदा बना दो
आज मेरे यारों ने ज़न्नत बना दी है ज़मीं पर
इन्हें फ़रिश्ते बनाना है इक पल को मुझे ख़ुदा बना दो।

कतरा-कतरा समंदर हो जायेगा ज्ञान नहीं था
मुट्ठी में कैद अम्बर हो जायेगा अनुमान नहीं था
आप सबके जज़्बे को नमन करता हूँ मेरे मित्रो
कार्यक्रम को इतना सफल बनाना आसान नहीं था।

ये तो हमारी हस्ती थी जो हर अलम झेल गये
क़ुछ अपने आये थे चिरागों में ज़हर पेल गये
फरमा बरदारों ने कहर ढाने में कसर ना छोड़ी थी
चिराग दूसरी ही मिट्टी के थे जान पर खेल गये।

 

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