3 ख़ूबसूरत ग़ज़लों की शानदार प्रस्तुति। 3 अलग अलग रंगों की ग़ज़लों की मोहक प्रस्तुति । Love Ghazals

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ग़ज़ल-आशना

जबसे उनसे हुई मेरी अनबन
तबसे सूना है शाख-ए-नशेमन।

कैसे कह दूँ के आ मेरे ज़ानिब
बेमज़ा हो गया हुँ मैं जानम।

जो महक ना बिखेरे फ़िज़ा में
क्यों सजाये कोई ऐसा गुलशन।

यूँ है आराइश-ए-आशियाना
जैसे उलझा हो कांटों से दामन।

फ़ासिला कुछ ज़हद ने बढ़ाया
बेख़ता था सदा से ये मुल्ज़िम।

इश्क़ है ये मुहिम न बनाओ
कुछ भरम भी रहे मेरा कायम।

हसरते आशना कुछ नही है
आँख जबसे हुई मेरी पुर नम।

क्या तकाज़ा करूँ क्या तनाज़ा
इश्क़ वाले न करते तसादुम।

वो ही मुंसिब उन्हीं की अदलिया
या ख़ुदा मैं हूँ आसिम वो बरहम।

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ग़ज़ल-दीवानापन

हमसे न पूछिये हबीब क्या हुआ मुझको
तेरा ये भोलापन दीवानापन छुआ मुझको।

इस अलम इल्म ने मुझको बुरा बनाया है
मैं भी तुझसा कभी हो जाऊं, दे दुआ मुझको।

सुना है जन्नतें मिलती हैं, प्यार में मरकर
जान देना है खेलना है, ये जुआ मुझको।

तंज़ कसता है ज़माना, ज़मीं पे पैर नहीं
तेरी सोहबत ने बनाया है, बदगुमां मुझको।

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ग़ज़ल-रफ़ा दफ़ा

अबस आज़माईश हो गई, वफ़ा होना चाहिये
मुआमला संजीदा है, रफ़ा दफ़ा होना चाहिये।

वो सुनें नहीं और हम, मिन्नतें दुआयें करते रहें
कभी कभी अपने ख़ुदा से, ख़फ़ा होना चाहिये।

चाँद अगर हाथ लग जाये, तो भींच लो बाहों में
अगर यह ख़ता है तो ये, ख़ता होना चाहिये।

यूँ नही मिलती सियासत में, ताज़दारी सबको
आदमी का ज़मीर थोड़ा, गिरा होना चाहिये।

घर में बच्चे भूखे थे, तुम नमाज़ पढ़ने आ गये
बड़े गुनाहगार हो मियां, सज़ा होना चाहिये।

इश्क विश्क कुछ नही हुआ, ग़लतफ़हमी हुई है
तुम तो होश में हो मौलिक, नशा होना चाहिये।

 

आराइश-ए-आशियाना-ज़िंदगी के हालात
तसादुम-भिड़ंत, तनाज़ा-विवाद,
अदलिया-अदालत, आसिम-दोषी, बरहम-नाराज़

अबस-तुच्छ, बेकार 

 

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