स्वतंत्रता दिवस पर भाषण स्क्रिप्ट। स्वतंत्रता दिवस के आयोजन पर मुख्य अतिथि/कार्यक्रम अध्यक्ष का भाषण । 15 अगस्त पर भाषण स्क्रिप्ट । मुख्य अतिथि का भाषण। कार्यक्रम अध्यक्ष का भाषण ड्राफ्ट

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मंच पर विराजमान आज के कार्यक्रम अध्यक्ष…….जी, माननीय विशिष्ट अतिथि……….जी एवम प्रिय देशवासियों। आप सबको आज़ादी के पर्व स्वन्त्रता दिवस की ह्र्दय से बहुत-बहुत बधाईयां-शुभकामनायें प्रेषित करता हुँ।

मित्रों, आज हम आज़ादी के पावन महोत्सव को मनाने के लिये एकत्रित हुये हैं। आज हम तिरंगे को और उत्तंग ऊँचाई पर स्वच्छन्दता से फहराने के लिये एकत्रित हुये हैं। आज हम अपने अमर शहीदों की महान शहादत को नमन करने के लिये एकत्रित हुये हैं।

 

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लेकिन सच कहूँ तो अब यह महापर्व प्रायः एक रस्म भर के तौर में मनाया जाने लगा है। मैं आपको एक छोटी सी घटना बताना चाहता हुँ। एक शिक्षण संस्थान में स्वतंत्रता दिवस के आयोजन में जाना हुआ। एक व्यवधान वश कार्यक्रम में थोड़ा बिलंब होने के कारण मैं वहाँ एक युवा शिक्षक से चर्चा करने लगा।

यूँ ही आज़ादी और स्वतंत्रता के महत्व पर उनसे थोड़ी चर्चा छिड़ गई तो मैंने पूछा आप बच्चों को देश की आज़ादी का महत्व बताया करें जिससे उन्हें आज़ादी की क़ीमत पता रहे, कि कितनी कठिनाई और संघर्षो के बाद हमें आज़ादी प्राप्त हुई है। गुरुजी ने तुरंत कहा जी बिल्कुल हम तो हमेशा ही बच्चों को आज़ादी का महत्व बताते हैं। मैंने कहा ये तो बहुत ही बढ़िया बात है। वाह।

फिर मैंने उनसे पूछ लिया कि जी आप क्या बताते हैं बच्चों को? तो वो थोड़े हड़बड़ा गये। अब गुरुजी को आशा नही थी कि मैं ऐसा प्रश्न पूछ लूँगा। आप को आश्चर्य होगा गुरुजी का उत्तर सुनकर, मास्टर साब बोले कि सर सही बतायें तो हमारी जाति और हमारी समाज को तो आज़ादी के नाम पर कुछ नहीं मिला।

 

 

 

हम आज भी आरक्षण के लिये संघर्ष कर रहे हैं। इस सरकार से आशा थी लेकिन यह सरकार भी कुछ करती नही दिख रही। हमें यहाँ प्रायवेट नौकरी करनी पढ़ रही है। उससे बाद तो मास्टर जी ने काफ़ी कुछ भड़ास सरकार, सिस्टम, भ्रष्ट तंत्र आदि पर निकाली। मैं बिल्कुल भौंचक्का रह गया। अब मै क्या कहता तो मैं विषय बदलकर चल दिया।

इस बात पर मुझे एक चुटकुला याद आता है कि एक महिला के पति का देहांत हो जाने पर जीवन बीमा निगम के अधिकारी ने पति की बीमा राशि का चेक उसे सौंपते हुये उससे औपचारिकता वश कहा कि मुझे यह चेक सौंपते हुये आपको बिल्कुल खुशी नही हो रही है, वो अधिकारी अपनी पूरी बात कह पाता उससे पहले ही महिला कुढ़कर बोली, हाँ एक महिला के हाँथ में इतनी रकम देखकर पुरुषों को कहाँ खुशी होने वाली। हे भगवान, वो क्या कह रहा है और वो क्या समझ रही है।

क्या हो गया हमारी संवेदन शीलता को। क्या हो गया हमारी समझ को। हम क्या सिखाने वाले हैं अपनी आने वाली पीढ़ी को? सरकार ने ये नही किया। सरकार ने वो नहीं किया। हमें आरक्षण नही मिला?

मित्रों, आज़ादी बड़ी ही अमूल्य है। देश की सम्प्रुभता, अखंडता और निज़ता को बनाये रखने के लिये हमारे वीर शहीदों ने अपने जीवन को न्योछावर कर दिया। हमारी पीढ़ी ने आज़ादी की कोई कीमत नही चुकाई है इसलिये हम इसका महत्व नही समझ रहे। हमको अपना नज़रिया बड़ा रखना होगा। हमें देश को आंगे ले जाने के बारे में सोचना होगा। देश को संगठित हो कर मज़बूत बनाना होगा। हमें चंद स्वार्थपरक लोगों के बौद्धिक आतंकवाद को समझना होगा। नहीं तो हम ऐसी ही छोटी छोटी चीजों के चक्कर मे फंस कर ख़ुद तो गर्त में गिरेंगें ही, देश को भी गर्त में धकेलेंगें।

योग्यता, विद्वता और काबिलियत से देश को आंगे बढ़ाने में योगदान दें तभी हम अपने देश को विश्व गुरु का दर्जा दिला पायेंगे। तभी हम स्वच्छदन्ता से आज़ाद देश मे सांसे ले पायेंगे। हमारी एकता और हमारे ह्रदय की विशालता ही हमारी ताकत है। आप सबको पुनः स्वंतंत्रता दिवस की ढेरों बधाइयाँ एवम शुभेक्षायें प्रेषित करता हूँ और अंत में महान शायर इक़बाल जी का एक शेर कहके अपनी बात समाप्त करता हूँ कि..

 

कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी
सदियों रहा है दुश्मन दौरे जहाँ हमारा।।

जय हिंद। वंदे मातरम

 

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