मंच संचालन स्क्रिप्ट-Manch sanchalan script

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दोस्तों अब मैं आज के कार्यक्रम के अध्यक्ष को दीप प्रज्जवलन के लिए मंच पर आमंत्रित करना चाहता हॅूं।

मित्रों हमारे कार्यक्रम अध्यक्ष एक ऐसे विराट व्यक्तित्व के धनी ऐसी शानदार शख्शियत जिन्होंने हमारे समाज को, हमारे शहर को हमारे प्रदेश को एक सकारात्मक दिशा दी है।

यह दो पंक्तियॉं उनको समर्पित करते हुए दीप प्रज्जवलन के लिए मंच पर आमंत्रित करना चाहता हूँ…..

कुछ चेहरे यूं ही नहीं मुस्कुराया करते
रंग बसंती वो यूं ही नहीं उड़ाया करते ।
बड़ी जिम्मेदारी है सारा जहाँ महकाना
कुछ फूल दुनिया में यूँ ही नहीं आया करते ।

जी हाँ दोस्तो सही पहचाना, वह खास व्यक्तित्व, वह बड़ी शख्शियत हमारे ही बीच के हमारे ही शहर के विराट व्यक्तित्व………………. जी हैं जो की ……………………..हैं। जोरदार तालियों के साथ उनका स्वागत करेंगे, अभिनंदन करेंगे ।

मैं………………………………………………………. से अनुरोध करता हॅूं कि………………… को मंच तक लेकर आयें। 

क्रम-5 दीप प्रज्जवलन

दोस्तो दीप प्रज्जवलन का शुभ मुहूर्त आ गया है। हमारी गणमान्य हस्तियां मंच पर आ गई है मैं इन चंद पंक्तियों के माध्यम से अपने ग्रुप के पदाधिकारियों से अनुरोध करता हॅूं कि वो हमारी डिगनिटीस् से दीप प्रज्जवलन की पंरपरा का शुभारंभ करें कि.. 

निगाहों में मंजिल थी गिरे
और गिरकर संभलते रहे
हवाओं ने बहुत कोशिश की मगर
चिराग आंधियों में भी जलते रहे 

क्रम-6 अतिथि स्वागत

मित्रों शुभ ज्योति के ओजमयी प्रज्जवलन के बाद हमारे कार्यक्रम का क्रम अतिथि स्वागत की ओर जाता है। मैं इन पंक्तियों के माध्यम से इस अतिथि स्वागत के क्रम को आरंभ करना चाहूंगा…. 

यह बड़ी सोच यह दूर दृष्टि
यह ऊर्जा हमें भी मिल जाये
तो हम सब के जीवन में भी
आशा की कौंपल खिल जाये।।
कृत उपकृत मन के भाव सुमन
हम सादर अर्पित करते हैं
श्रीमान् पधारे आप यहाँ हम
सब मिल स्वागत करते हैं ।। 

मैं संस्था के अध्यक्ष उपाध्यक्ष एवं सचिव जी से अनुरोध करता हूँ की वो मंच पर आकर क्रमशःमुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि एवं आज के कार्यक्रम अध्यक्ष जी का स्वागत करें.

दोस्तों इस भव्य एवं गरिमामयी अतिथि स्वागत कार्यक्रम के लिए एक बार जोरदार तालियॉं बजा दीजिए । 

क्रम-7 अध्यक्षीय उद्बोधन-

कार्यक्रम का यह क्रम अध्यक्षीय उद्बोधन का है मैं हमारी संस्था के अध्यक्ष माननीय श्री……….. से अनुरोध करता हॅूं कि वो मंच पर आयें और चंद उद्गार व्यक्त करें।

जी हॉं दोस्तों हमारे सौम्य, सरल, सहज एवं नेतृत्व कुशल अध्यक्ष जी को इन पंक्तियों के माध्यम से उद्बोधन के लिए बुलाना चाहूंगा। 

छू ले आसमां जमी की तलाश मत कर
मजा ले जिंदगी का खुशियों की तलाश मत कर
गमों से दूर होकर तेरी तकदीर बदल जायेगी
मुस्कुराना सीख ले उसकी वजह न तलाश कर 

एक बार जोरदार तालियॉं हमारे अध्यक्ष जी के लिए । 

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