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स्थापना दिवस’ 
दिनांक -09 अगस्त 2016 
कार्यक्रम संचालक-अमित ‘मौलिक’  
 
क्र.1  कार्यक्रम आरंभ की घोषणा  
 
मौलिक- हमारे दिगम्बर जैन सोशल ग्रुप जबलपुर नगर के सभी मित्रों और हमारे खास मेहमानों को जय जिनेन्द्र, प्रणाम, नमस्कार।
मै अमित मौलिक आज के इस स्थापना दिवस के कार्यक्रम में आप सब का बहुत बहुत स्वागत, वंदन, अभिनंदन करता हॅूं….. 

दोस्तो आज की शाम बहुत ही खास शाम है, आज का दिन वो खास दिन है जिस दिन हमारे नगर ग्रुप के विराट परिवार का जन्म हुआ था, गठन हुआ था, सृजन हुआ था । यकीन मानिये आज की खास शाम, खास आपके नाम ही है।  मैं इन दो पंक्तियों के माध्यम से आज की इस खुशनुमा शाम की शुरुआत करना चाहूंगा… 

 

ना गिनकर देता है न तौलकर देता है, 
ईश्वर जब देता है तो दिल खोलकर देता है।

 

जी हाँ दोस्तो आज की इस खूबसूरत शाम के इस खूबसूरत आलम के बारे में तो यही कहा जा सकता है। आज यहाँ रंगों की बरसात होगी, खुशियों से बात होगी, आज परियाँ नाचेंगी यहाँ पर, आज फरिश्ते झूमेंगे यहाँ पर, आज रिश्तों में बहार आयेगी, आज अमृत की फुहार आयेगी, आज आनंद बरसेगा, आज कोई नहीं तरसेगा।

और आज की यह शाम खास तो सिर्फ आपके नाम है, तो एक बार आप अपने लिए जोरदार तालियां बजा दीजिये।

मित्रों, कायनात का सबसे खूबसूरत अहसास है किसी चीज का सृजन होना। जब कोई चीज इस प्रकृति में जन्म लेती है-अस्तित्व में आती है, वह पल सबसे खूबसूरत पल हो जाता है।

चाहे नन्ही कौंपलों के जेरेसाया ताजा-ताजा खिला हुआ खूबसूरत फूल हो या नव पल्लिवित पुष्पों की महकती हुईं क्यारियां हों।  सृजन एवं रचनात्मकता इस कायनात की सबसे ज्यादा आनंदित करने वाली स्थिति है ।

हमारा दिगम्बर जैन सोशल गु्प जबलपुर नगर हमारे सोशल गु्प की राष्ट्रीय फेडरेशन के सुरक्षित एवं सृजनात्मक क्यारी के मध्य खिला हुआ एक ऐसा फूलों का गुलदस्ता है जो अपनी महक से आज जबलपुर ही नहीं सारे जहाँ को महकाने के लिए उत्सुक है ।

स्थापना दिवस के इस खास मौके पर हमारे गु्प की करिश्माई एवं अलबेली महक से सराबोर इस महोत्सव में आपका बहुत बहुत स्वागत है।

तो प्रिय मित्रो, इंतजार की घड़ियाँ अब समाप्त हो गई है, मैं इन पंक्तियों के माध्यम से इस महोत्सव का आगाज करना चाहता हॅूं कि….

नीले आसमां से धुंध अब छटने वाली है
खुशनुमा आलम है फिजा बहकने वाली है
कुछ फरिश्ते, परियां आने वाली थीं, आ गये हैं
सौगातें अब चंद पलों में बटने ही वाली हैं। 

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