मंच संचालन के लिये शायरी-पार्ट 2 । Manch Sanchalan ke liye shayari -part 2

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मंच संचालन के लिये शायरी – प्रस्तुत है Anchoring shayari की श्रृंखला में दूसरी कड़ी मंच संचालन के लिये शायरी । आशा है आप सबको पसंद आयेगा। 

मंच संचालन के लिये शायरी

इस रंग भरे गुलशन में हम,
खुश्बू का गगन बनायेंगे
लज़्ज़त के नए हिंडोलों में,
झूलेंगे और झुलायेंगे
यह महज़ नहीं इक आयोजन,
यह बरसातों का मेला है
हम आज सुधा बरसायेंगे,
भीगेंगे और भिगायेंगे।

सबकी गरिमा के अनुरूप,
सादर अभिवादन करते हैं
मंगल मूर्ति को दीप जला,
मंगल का गायन करते हैं
मेहमानों के स्वागत का भी,
क्रम का अनुपालन आवश्यक
बस इंतज़ार अब ख़त्म हुआ,
हम अभी शुभारंभ करते हैं।

हड़बड़ी न करें साहिबान,
आप इस तरहा रूठ कर न जायें
ये सिलसिला मुहब्बत का है,
ये कड़ियाँ कहीं टूट न जायें
हमने आपके लिए सितारों,
परियों का जमघट लगाया है
अब तो रहमतें बंटने ही वाली हैं,
जनाब कहीं छूट ना जायें।

आओ करीब आओ डरो नहीं,
जी भर के लूट लो
फिर ना कहना मोहब्बत बट रही थी,
और हमें कतरा ना मिला।

ये शाम ये समां ये लुत्फ़, ये दिलकश आलम
ज़न्नत अगर होगी, तो यक़ीनन ऐसी ही होगी।

ये महज़ महफ़िल नहीं है, ये ख्वाबों की ज़मीन है
परदा तो उठने दो दोस्तो, ढेरों हसीं वाकयात होंगे।

ले सुहानी शाम आई, इश्क़ को आग़ोश में
फूल सज कर आये हैं, ख्वाबों की माला पहिनकर
इत्र मल-मल कर चली, पुरवाई हरसू नींद में
लड़खड़ाकर गिर पड़ीं, खुशियाँ हमारी गोद में।

तड़प सीने में हो आँखें, कहानी बोल देती हैं
चुभन पाँवों में उठती हो, निगाहें बोल देती हैं
हँसी करती रही दिन भर, दिखावा मुस्कराने का
धुँवा किस ओर उट्ठा है, हवायें बोल देती हैं।

हमने भी अच्छे अच्छों का ईमान ख़राब देखा है
मौका परस्तों का दस्तूर रिवाज़ ए हिसाब देखा है
हवा हर बार जिनको बख्श देती थी मोहब्बत में
उन्हीं चिरागों को हमने हवाओं के ख़िलाफ़ देखा है।

ना थामा हाँथ कोई गम नहीं उंगली पकड़ लेता
मैं खुश्बू बनके उड़ जाता अगर बाहों में भर लेता।

अतिथि स्वागत शायरी पार्ट 4

मंच संचालन-स्थापना दिवस 

• मंच संचालन स्क्रिप्ट-Annual Function

कोई कहता मंदिर जाओ, जप तप कर लो ध्यान करो
कोई कहता मस्ज़िद जाओ, सज़दा कर रमजान करो
इक सबक मुहब्बत का भूले, हर दिल में ईश्वर बसता है
पूजा सज़दा हो जायेगी, हो सके तो सबको प्यार करो।

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