Anchoring Shayari in hindi-मंच संचालन के लिए शायरी Manch Sanchalan ke liye shayri

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धुन्ध ही धुंध थी पूरा आसमान,
सर पे उठा रक्खा था
एक बार हुज़ूर क्या कह दिया हमने,
आतंक मचा रक्खा था
हमने इक रोज़ इमदाद मांग कर,
उनकी हवा ख़राब कर दी
जिन्होंने खुद को बहुत बड़ा,
सुल्तान समझ के रक्खा था।

बिना दुश्वारी के बिना तकलीफों के
ये नामुराद ख़्वाब कहाँ संवरते है
हवा चाहे तो आतंक मचा कर देख ले
हम वो चिराग हैं जो आँधियों में भी जलते हैं।

दुनियादारी के रंग ढंग मुझमें भी हैं,
मैं कोई जहां से अलग या जुदा नहीं हूँ
कोई ग़लती हो जाये तो माफ़ कर देना,
मै भी इंसान हूँ कोई खुदा नहीं हूँ।

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इन तंत्र-मन्त्र टोटके करने वालों को
भगवान नहीं कह सकते
चंद सिक्के दान कर देने वालों को
महान नहीं कह सकते
उदास चेहरे पे मुस्कान लाओ,
तो रकीब भी कह दें तुम्हें
खुदगर्ज़ सिर्फ खुदगर्ज़ ही होते हैं,
उनको इंसान नहीं कह सकते।

इन रंग भरे पर्दों के पीछे से
गुनगुनाती खुशबु आ रही है
इक जुनूँ की लहक एक शिद्दत इक तड़प
सपनीली दुनिया मुस्करा रही है
अब तो दिल भी काबू में नहीं
धड़कनें भी उतावली सी हैं
ये बगावती इशारे कहीं इस बात के तो नहीं
कि अगली प्रस्तुति धमाके वाली आ रही है।

कुछ चेहरे यूँ ही नहीँ मुस्कराया करते
रंग बसंती वो यूँ ही नहीँ उड़ाया करते
बड़ी जिम्मेदारी है सारा जहाँ महकाना
कुछ फूल दुनियाँ में यू ही नहीँ आया करते।

कौन कहता है मुस्कराहटों के संजोग नहीं होते
दुनियाँ में अब मोहब्बतों के रोग नहीं होते
फरिश्तों और परियों का मेला लगा हुआ है यहाँ पर
शायद उन्होंने अब तक ग्रीन क्लब के लोग नहीं देखे।

कहाँ हैं ऐसे लोग जो निस्पृह रण में जूझने जाते हैं 
परहित में निजहेतु त्यागकर प्यार बाँटते जाते हैं 
आशाओं के पुष्प पल्लवित होते इन्हीं मालियों से 
आओ इनका स्वागत करके जीवन सफल बनाते हैं।

नीले आस्मां से धुंध अब छंटने ही वाली है
खुशनुमा आलम है फिजा बहकने वाली है
कुछ फरिश्ते और परियां आनी थी वो भी आ गईं
सौगातें भी अब चंद पलों में बंटने ही वाली है।

ताब आब बर्ताव नज़रिये ज़ज़्बात सब ऐसे ही होते
ये दानिशमंदी ये रहनुमाई के अंदाज़ ऐसे ही होते
हमने मुहब्बत के मसीहा देखे तो नहीं पर लगता है
कि फरिश्ते अगर होते तो क़ुछ क़ुछ आप जैसे ही होते।

आप काबिलों के काबिल आलिमों के आलिम हैं
गम में पुकारो ख़ुशी में पुकारो आप सदा हाज़िर हैं
हमें नाज़ है कि आप जैसी शख्शियत हमारे बीच में है
आप जैसे लोग इंसानों में नहीं फरिश्तों में शामिल हैं।

हौसला बाज़ार में नहीं मिलता, पैदा किया जाता है
नीलकंठ तो बनना है सबको, ज़हर नहीं पिया जाता है
तड़प हो तो पर्वत का सीना चीर, नीर फूट पड़ता है
कदम बढ़ाओ मौका माँगा नहीं, छीन लिया जाता है।

ज़िन्दगी को खूबसूरत बनाना, कतई मुश्किल नहीं
शर्त ये है कि तुमसा कोई, पास होना चाहिये।

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Comments

  1. By bhupendra saini

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  3. By जोशी जी

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  4. By राजेश जैन

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    • By राजेश जैन

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आपकी सराहना, आपके सुझाव और आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिये दुआओं की तरह है-नैमतों की तरह है। आपसे वार्तालाप मेरे लिये सौभाग्य का विषय है। कृपया अपने शाब्दिक उद्गार comment box में अवश्य ही व्यक्त करें। प्रतीक्षा में-अमित 'मौलिक'

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