दान शायरी : दान पर शायरी – दानदाता पर शायरी, donation quotes, दान पर मंच संचालन शायरी, donation poem

दान शायरी – Dear friends, आपने देखा होगा कि हमारे आसपास मंदिरों में, धार्मिक स्थलों में, charitable संस्थाओं में ऐसे कई आयोजन होते हैं जिनमें उस स्थान या संस्था के लिये दान दातार डोनेशन करते हैं क्योंकि ऐसी सभी संस्थाएं या स्थल दान राशि से ही चलती हैं।

ऐसे अवसर पर कार्यक्रम संचालक दान दातारों को प्रोत्साहित के लिये दान शायरी या दान पर दोहे  या दान पर पंक्तियाँ बोलता है। दान सदा प्रेरणा और श्रद्धा का विषय होता है। प्रेरित करने या प्रेरित होने पर दातार दान करता है। अगर आप मंच संचालक या वक्ता हैं तो आपके लिये आज के इस पोस्ट में मैं दान शायरी लेकर आया हूँ। आशा है कि आपको पसंद आयेगी। सदा की तरह आपकी प्रोत्साहित करती प्रतिक्रिया का इंतज़ार रहेगा।

दान शायरी - दान पर शायरी

दान शायरी

जनसेवा की भावना, पर पीड़ा संताप
ऐसे श्रेष्ठी अब कहाँ, जैसे दानी आप।

श्रेष्ठीजन में श्रेष्ठ हैं, दानवीर सरताज
सदा आपके सर सजे, दानपति का ताज।

दौलत के संग पाई है, दिलदारी भरपूर
आप के जैसा दूसरा, दानी नहीं हुज़ूर।

पुण्य काज में दान को, तत्पर रहे तुरंत
सर्वश्रेष्ठ उसको कहें, ज्ञानी ध्यानी संत।

माया छाया होत है, घटती बढती जात
दान करे से बढ़त है, बिन बाँटे घट जात।

दानी ना देखा कभी, जग में आप समान
दोनों हाँथों देत हैं, रंच मात्र ना मान।

वंदन अभिनंदन करे, धरा और आकाश
दानवीरता आपकी, जग में है विख्यात।

कद ऊँचा तो कर लिया, ऊँचे रखो विचार
दान धर्म जो ना किया, जीवन है बेकार।

किसे ख़बर कब लक्ष्मी, छूमंतर हो जाये
रोके से घट जात है, दान करो बढ़ जाये।

आंगे आकर दान दें, जिनके होते भाव
श्रेष्ठी लगें कुबेर से, निर्मल दिखे स्वभाव।

बड़भागी वो कौन है, ले प्रभु चरण पखार
प्रथम भाग्यशाली करे, नरतन का उद्धार।

जिसका उसको सौंप दो, क्या तेरा है जाय
पाता उसका सौ गुना, जितना देकर जाय।

आज मिला अवसर करो, सार्थक अपना धन
भाव बनाओ दान का, कर लो जीवन धन्य।

आप के भाव अनूप हैं, आप की भक्ति अनूप
ह्रदय कर्ण सा आपका, भामाशाह सा रुप।

विमल भाव हैं आपके, विमल आपका काज
कृत कारित अनुमोदना, करता सकल समाज।

◆एंकरिंग शायरी । मंच शायरी

Donation poem

Jan seva ki bhaavna,
par peeda santaap
Aise shreshthi ab kahan,
jaise daanee aap.

Shreshthi jan me shreshth hain,
daan veer sartaaz
sada aapke sar saje,
daan pati ka taaj.

Daulat ke sang laayee hai,
Dildaari bharpoor
aap ke jaisa doosra,
daanee nahin huzoor.

punya kaaj me daan ko,
tatpar rahe turant
sarv shreshth usko kahen,
gyaani dhyaani sant.

maaya chhaaya hot hai,
ghatti badhti jaye
daan kare se badhat hai,
bin baante ghat jaat.

daanee na dekha kabhee,
Jag me aap samaan
donon haanthon det hain,
ranch maatra na maan.

vandan abhinandan karen,
dhara aur aakaash
daan veerta aapki,
duniya me vikhyaat.

kad ooncha to kar liya,
oonche rakho vichaar
daan dharm jo na kiya,
jeevan hai bekaar.

kise khabar kab lakshmee,
chhumantar ho jaaye
roke se ghat jaat hai,
daan kare badh jaaye.

aanga aakar daan den,
jinke hote bhaav
shreshthee lagen kuber se,
nirmal lage swabhaav.

badbhaagi vah kaun hai,
le prabhu charan pakhaar
Pratham bhaagya shaali kare,
naratan ka uddhaar.

jiska uski sauno do,
kya tera hai jaay
paata uska sau guna,
jitna dekar jaaye.

aaj mila avsar karo,
saarthak apana dhan
bhaav banaao daan ka,
kar lo jeevan dhanya.

aap ke bhaav anoop hain,
aap kee bhakti anoop
hradaya karan sa aapka,
bamashaah sa roop.

vimal bhaav hain aapake,
vimal aapka kaaj
krit kaarit anumodana,
karta sakal samaaj.

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Comments

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  2. By yasir

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  3. By Jyoti

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