तड़पते दिल की दो मोहक ग़ज़लें । रोमांटिक ग़ज़ल । इश्क़ मोहब्बत में तड़प की ग़ज़लें । Love Gazal

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ग़ज़ल-बदमाश

मेरा हाल क्या है न पूछिये
ये न ख़ास था ये न ख़ास है
दिल कल भी था यूँ ग़मज़दा
और आज भी ये उदास है।
यूँ तमाशा होता है रात दिन
मेरी हसरतों का न पूछिये
गोया रहनुमा हो बहार का
जिसे खुश्बुओं की तलाश है।
ये नज़ारे चाँद धनुक घटा
तेरा नूर लूट के मुस्तक़िल
मैं जो हो गया बदमाश क्या
ये ज़हान ही बदमाश है।

 

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ग़ज़ल-बेशरम

कोई धुन बने भी तो क्यों बने
कोई तान कैसे सुनाऊँ मैं
ये ग़ज़ल मेरी बेज़ान है
मेरी मुरकियों में ख़राश है।
जिसे नागवार हैं दायरे
जो रिवायतों से ख़फ़ा बहुत
हम जिसे बयान न कर सके
मैं वो काश हूँ तू वो काश है।
मेरा गम तुझे क्या बताऊँ मैं
के खुशी की कोई ख़ुशी नही
तू मेरे करीब तो है बहुत
तू मगर न मेरे पास है।

ग़ज़ल-तो क्या हुआ

आसमां के छोर से हम
गिर गये तो क्या हुआ
सोज़ में सब ओर से
हम घिर गये तो क्या हुआ।
वो कहाँ करते हैं परवाह
प्यार में ज़ुल्मात की
इश्क़ वालों के धड़ों से
सिर गये तो क्या हुआ।
धुत्त होकर वो जली तो
हौसले भी जल गये
हम पतंगे ख़ाक में जो
मिल गये तो क्या हुआ।
हाँ उन्हीं के हाथ मे हैं
कत्ल का ये फैसला
रहनुमा मेरे सभी
क़ातिल हुये तो क्या हुआ।
थोड़ी खुशियाँ ढेर गम
थोड़ी सी यादें सौंपकर
वो कसम वादों से अपने
फिर गये तो क्या हुआ।

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