क्षमापना पर्व के संदेश हिंदी में । पर्युषण के क्षमावाणी संदेश । क्षमापना पर्व के मैसेज । दशलक्षण धर्म के क्षमावाणी संदेश

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जाने-अनजाने में मैंने अपने शब्दों से या व्यवहार से आपके निर्मल मन को कभी आहत किया हो-ठेस पहुंचायी हो तो मुझे नादान समझ कर क्षमा करें।

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एक मानव होने के नाते हम सब कहीँ ना नहीँ-कभी ना कभी अहम्, द्वेष, अहंकार, दुश्मनी, वैमनस्य जैसे मानवीय अवगुणों से चाहे अनचाहे ग्रसित हो जाते हैं। जाने अनजाने में मेरे द्वारा किये गये अव्यवहारिक कृत्यों और गलतियों से आपके ह्रदय को आघात पहुंचा हो तो मुझे क्षमा करें।

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आप जैसे अति संवेदनशील, विशाल ह्रदय, गुणी स्वजनों का कोमल ह्रदय मेरे जैसे सामान्य इंसान नें अगर दुखाया हो तो मै आज उत्तम क्षमावाणी पर्व के इस पवित्र दिन को आपसे अपने अपराधों और त्रुटियों के लिये क्षमा मांगता हूँ। आपसे अनुरोध है की अपनी विशाल ह्रदयता का परिचय देते हुये मुझे क्षमा करें।

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कभी जाने अनजाने में, सुनने सुनाने में, पूछने बताने में, मान सम्मान देने में मैंने अपनी भाव भंगिमाओं से, अपने शब्दों से, अपने रवैये से आपके सुकोमल हृदय को आघात पहुँचाया हो तो इस क्षमावाणी के दिन आपसे अपनी धृष्टता अपनी त्रुटियों अपनी उद्दण्डताओं के लिये कर बद्ध होकर क्षमा माँगता हूँ। आशा है कि आप मुझे क्षमा कर अनुग्रहीत करेंगें।

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कहते हैं कि क्षमा बड़न को चाहिये छोटन को उत्पात। जिस भी विद्वान ने कही है स्वाभाविक बात कही है। इंसान के व्यवहार पर उसकी उम्र, तज़ुर्बा, शिक्षा, बुद्धि, स्वभाव आदि ढेरों बातें हैं जो उसके व्यवहार को नियत करतीं हैं। अतएव व्यवहारगत त्रुटियां कोई अस्वाभाविक बात नही रह जाती।

जाने अनजाने स्वभावगत भिन्नता वश गलतियाँ हो ही जातीं हैं। आप जैसे सुधिजन इस बात को भलीभांति जानते हैं। क्षमावाणी के इस आत्मशुद्धिकरण के अवसर पर गत वर्ष हुयेअपराधों और गलतियों के लिये मैं आपसे ह्रदय से क्षमा माँगता हूँ।

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ईश्वर ने मानवों को मूलतः एक सा स्वरूप प्रदान किया है। नक्श-अक्श- रंग और यापन का ढंग भी कमोबेश एक सा ही रहता है। किंतु प्रवत्ति, दृष्टि , सोच, बोध, स्वभाव, समझ और सम्वेदना सबकी अलग-अलग हो सकती हैं, हो जाती हैं। यही स्वभावगत भिन्नता हमारे खुद के या हमारे द्वारा किसी अन्य के संताप का कारण बन जाती है।

निश्चित रुप से एक सामाजिक प्राणी के रुप में कभी ना कभी-किसी ना किसी स्थिति या घटना में हमारे द्वारा किया गया कार्य , व्यवहार, शाब्दिक प्रतिक्रिया या भाव-भंगिमा किसी के कोमल ह्रदय को आहत कर सकती है-कर भी देती है।

आज पावन पर्युशण के इस शुद्धीकरण के पवित्र दिन का लाभ उठाते हुये मैं आप सब गुणीजनों एवम स्वजनों से जाने अनजाने में हुई गलतियों, त्रुटियों , शाब्दिक दंश और उपेक्षापूर्ण रवैये के लिये करबद्ध होकर कातर भाव से क्षमा मांगता हूँ। आशा है कि मेरी कमियां मेरी तुच्छता और मेरी सीमायें को ध्यान में रखते हुये आप मुझे क्षमा कर देंगे।

 

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