अटल जी पर श्रद्धांजलि कविता – अटल जी के ऊपर श्रधांजलि कविता, ट्रिब्यूट पोएम ऑन अटल जी

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अटल जी पर श्रद्धांजलि कविता – मित्रों, 2 दिन पहले ही हमारे देश ने एक अनमोल रत्न खो दिया है। हम सबके प्रिय पूर्व प्रधानमंत्री, महाकवि, महान विचारक, भारत रत्न, प्रखर वक्ता तथा अतंर्राष्ट्रीय राजनेता माननीय श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी हमें छोड़कर निर्वाण को प्राप्त हो गये। सारा देश स्तब्ध हो गया। भारत बर्ष में अभूतपूर्व शोक की लहर दौड़ गई। देश अभी भी सकते में है कि हमने उन्हें खो दिया। ऐसी महान आत्मा को श्रद्धांजलि स्वरूप मैंने कुछ कविताएं अर्पित करने का प्रयास किया है। महाकवि के ऊपर कविता लिखना मेरी औकात से बाहर का मसला है किंतु जो भी टूटा फूटा मेरा सामर्थ्य है मैंने भाव सुमन उनको अर्पित करने का प्रयास किया है। 

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इस राजनीति के दलदल में, इक कमल छोड़कर चले गये
हर सच्चे हिंदुस्तानी का, दिलअटल तोड़कर चले गये।

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अटल जी पर श्रद्धांजलि कविता

। तुम जल्दी वापिस आ जाना।

तुम चले गये मनमर्जी से,
मनमर्जी करते आये हो
उसको ही छोड़ गये तन्हा,
तुम जिस पर मरते आये हो।

क्या लगता है? सब बढिया है?,
अब चिंता की कुछ बात नहीं?
चंदन ही चंदन शेष बचे,
नंदन वन में अब सांप नहीं?

इंसान आप सा दुनियां में,
दशकों-शतकों में आता है
क्या कहूँ कहा नहीं जाता है,
बिन कहे रहा नहीं जाता है।

पथ पर तो चलना सिखा दिया,
पर मंज़िल मिलना बाकी है
यह राजनीति की बात नहीं,
बस चिंता भारत माँ की है।

हे अटल बिहारी अवतारी,
गर बहुत ज़रूरी है जाना
जाओ पर ज्यादा दूर नहीं,
तुम जल्दी वापिस आ जाना।

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अटल जी पर श्रद्धांजलि कविता

। थे अटल परम् पूर्ण व्यक्ति ।

दुनियां ने देखा सुना बहुत,
मेधावी सत्ताधीशों को
संसार साक्षी है उनका,
जो झुकवाते थे शीशों को।

पर अटल बिहारी एक ही थे,
जो दिल की बात बताते थे
हो मंत्रमुग्ध जग सुनता था,
सब तर्क कुंद हो जाते थे।

ना झुके कभी ना झुकने दिया,
वो सबको गले लगाते थे
मुस्कान लूटते थे थोड़ी,
जमकर मुस्कान लुटाते थे।

अच्छाई और बुराई का,
अब अंतर गहरा जायेगा
शुचिता की राजनीति होगी,
यह ख़्वाब सुनहरा जायेगा।

अब तुंग हिमालय मौन हुआ
हिमखंड दुःखी हो घुलते हैं
इस ग़म में डूबा लाल किला
अब कहाँ मसीहा मिलते हैं

मुस्कान सजा कर होंठों पर
चिरनिंद्रा में सो गया वही
चिर जीवन मुखर रहा था जो
यकबयक मौन हो गया वही

युग दृष्टा थे युग पुरूष कहें
या महामहिम पद छोटे हैं
थे अटल परम् पूर्ण व्यक्ति
सदियों में कुछ ही होते हैं।

अगर यह आर्टीकल अटल जी पर श्रद्धांजलि कविता आपको कैसा लगा। अपनी अमूल्य प्रतिक्रिया अवश्य दें।

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