ईश वंदना-ईश आराधना Archive

कविवर भूधरदास जी कृत बारह भावना। Kavivar Bhudhar das ji krit barah bhawana

                    बारह भावना राजा राणा छत्रपति, हाथिन के असवार । मरना सब को एक दिन, अपनी-अपनी बार ॥ दल बल देवी देवता, मात-पिता परिवार । मरती बिरिया जीव को, कोऊ न राखन हार ॥ दाम बिना निर्धन दुखी, तृष्णा वश धनवान । कबहूँ न सुख संसार

संत जैन आचार्य 108 श्री विद्यासागर महाराज जी पर कविता। sant Jain Acharya 108 Shri Vidyasagar Maharaj ji par poem

 चित्र साभार-vidyasagar.net   -आचार्य श्री के चरणों में 4 पंक्तियाँ- कैसे कह दूँ क्यों बहती हैं, मैं क्या जानूं क्या कहती हैं होकर बे-होश बहक जातीं, भीगी-भीगी सी रहती हैं भगवान अगर यूँ मिल जायें, कोई कैसे ना बेसुध हो गुरुवर को देख छलक जातीं, अखिंयां मेरी रो पड़ती हैं।   -आचार्य श्री विद्यासागर जी

श्री गणेश वंदना । Shri Ganesha vandana

मंगलम मंगलमयी वरदान दो शुभसदन शुभ हो सदा शुभ गान दो दहशतों की गर्द में सब ज़र्द हैं अमन वाली हर सुबह हर शाम दो चाहतों से कम मिले कुछ गम नहीं हमनिवाला हर कदम इंसान दो शंक ना भय रंच ना कोई पंक ना द्वन्द दंभों से परे ये ज़हान दो हम ना चाहें

भगवान बाहुबली पर कविता। Bhagwaan bahubali Hindi Poem

  स्वर्गों का सुख धन राज पाट, ऐश्वर्य ना मन को भाया था निज भ्रात लड़ें पद लिप्सा में, ऐसा मद रास ना आया था सब जीत गये मन हार गए, नश्वरता से मुख मोड़ लिये फिर बाहुबली ना रहे प्रभु, सुख रूप हुये सुख धाम भये निश्चय से धन्य-धरा-युग है, जो श्रवण बेल गोला

देवी गीत । Devi Geet

देवी गीत  जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तु ते  मैया मेरी मैया मेरी, कृपा करो कृपा करो कब से पड़ी अर्जी मेरी, कृपा करो कृपा करो नतेभ्यः सर्वदा भक्त्या, चण्डिके दुरितापहे रूपं देहि जयं देहि, यशो देहि द्विषो जहि दुख हरण करने वाली हो, तुमको बारम्बार नमन सर्वेस्वरी कृपा

देवी गीत । Devi Geet । माँ गौरी देवी गीत । Maa Gauri devi Geet

देवी गीत  परमेश्वरी सर्वेश्वरी जग्दिश्वरि माँ नारायणी माहेश्वरी माँ भवमोचनी जया भवानी माँ भावनी कण कण में तुम हो तृण तृण में तुम सृष्टि तुम्हीं हो सृष्टि में तुम नीले गगन से अहिलोक तक तेरी ही लीला माँ भावनी निधियों की दात्री सम्पूर्ना कला समाग्री शुभ सर्जना स्वर शोभना हो सुरसुंदरी तू ही अगम्या माँ

देवी गीत । भगवती स्तुति । Devi geet। Bhagwati stuti

देवी वंदना  सर्वेश्वरी जग्दीश्वरी तेरी शरण अज आये हैं मन शांत सरल किया है माँ कुविचार भी तज आये हैं आँखे विव्हल भक्ति प्रबल मेरा रोम रोम प्रसन्न है नयनाभिराम है छवि तेरी लख पाये जो हम धन्य हैं श्रीफल सुपारी लौंग चंदन पुष्प केशर लाये हैं शुभ दीप ज्योति है उज्जवला हम आरती को

बरसाने के दोहे। Barsaane ke dohe

  तृण पण कण में नाद सा, महक उठे नवनीत पुलकित सुन जीवन हुआ, बरसाने के गीत। धड़कन धड़कन राधिका, नस नस उड़ती प्रीत बरसाने में गूंजता, मुरली का संगीत। हृदय व्यथा अब कथा सी, बन फैली चहुँ ओर कुंज ठिठोली कर रहे, कहाँ हैं नवल किशोर। नैन खुले तो आप हो, नैन मुंदे तो

श्री महावीर भगवान का मंगला चरन/Shri Mahaveer bhagwaan ka mangla charan

जय वर्धमान महा जिनेश्वर हमको सन्मति दान दो प्रभु आज रसना में बसो महावीर हो महादान दो रहे शंक ना भय रंच ना, कोई पंक ना मम उर बसे कोई द्वन्द ना कोई दम्भ ना तेरी वंदना अधरन सजे सब शूल फूल बना दो भगवन अधर जिनपद गान दो कोई गाँठ ना हो पाप की
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