ग़ज़ल-बेशरम। Gazal-Besharam

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जो बचा बाँट लें, तल्ख़ रिश्ता करें
अलहदा ठीक है, ख़त्म किस्सा करें

ख़्वाब भर आहटें, रात भर करवटें
इक पहर भर कसम, आओ हिस्सा करें

इंतज़ामात कुछ, कुछ ख़ुरानी करो
आओ दिल तोड़ लें, हाल ख़स्ता करें

बांकपन मस्तियाँ, आशना छोड़ दो
थोप कर तोहमतें, ग़ार चस्पा करें

चांदनी बेअदब, नूर कातिल हुआ
चाँद से दूरियां, रफ़्ता-रफ़्ता करें

आसमाँ बन गये, तल्खियों के धुंये
क्या मसीहा करें, क्या फरिश्ता करें

सख्तियां नर्मियां, सारे टोने किये
और क्या बेशरम, दिल का नुस्खा करें 

तल्ख़-कड़वे, शुष्क
अलहदा-अलगाव, जुदाई
ख़ुरानी-घात करना, पीड़ा पहुँचाना
ख़स्ता-टूटा हुआ, उदासीन
आशना-प्रेमी-प्रेमिका, प्रेम
ग़ार-विश्वासघाती, धोखा देने वाला

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Comments

  1. By Akash

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आपकी सराहना, आपके सुझाव और आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिये दुआओं की तरह है-नैमतों की तरह है। आपसे वार्तालाप मेरे लिये सौभाग्य का विषय है। कृपया अपने शाब्दिक उद्गार comment box में अवश्य ही व्यक्त करें। प्रतीक्षा में-अमित 'मौलिक'

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