कश्मीर में सेना के जवानों से हुई बदसलूकी पर आक्रोश जताती कविता। Poem against Indian army being insulted in Kashmir by some kashmiris.

 

नहीं है पहनी चुड़ियाँ हमने, रण कंकण बाँध के रखते है।
देश के सम्मान के खातिर, नरमुंड तैय्यार भी रखते है।।

वीर सिपाही हम बाजू में आग, सीने में फौलाद रखते है।
हम निडर प्रहरी भारत माता के, चरणों का मान रखते है।।

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चुटकी में मसल दे चीन की सेना, या फिर हो पाकिस्तान,
हर क्षण मुस्तैद हम रक्षक, अपनी हथेलियों में जान रखते है।

अपने देश के गद्दारों से, अपमान सहना कोई मजबूरी नहीं,
देश के चंद नेताओं के कर्मों का, अपनी वर्दी पर दाग रखते है।

चाहे तो एक पल में संगीनों पे, लटका दें इन पत्थरबाजों को,
अमन और शांति के नाम पर, हम घूसे और लात सहते है।

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औकात नहीं जिनकी दो कौड़ी, की भी उन बेगैरतों के आगे,
कुचलकर अपना स्वाभिमान, देशभक्ति की शान रखते है।

बैठकर सियासत के सिंहासन पर, बड़ी बड़ी बातें करते जो,
उन नपुसंकों के स्वार्थपरता पर, हम मौन प्रतिकार रखते है।

सहते सहते टूट गया जिस दिन, तट बंध सब्र हम लहरों का,
बह जायेगा तृण सा सबकुछ हिय में, प्रलय का तूफां रखते है।

 

अतिथि रचनाकार-
मैं श्वेता सिन्हा, मुझे लिखने और पढ़ने में रूचि है। मैं कविता, गज़ल, मुक्तक, छोटी कहानियाँ और संस्मरण लिखने में विशेष रूचि रखती हूँ। आशा है आप पाठकगण मेरी रचनाओं से स्वयं को जोड़ पायेंगे और भावों का आनन्द लेंगें। कविता पसंद आये तो प्रतिक्रिया अवश्य दें जिससे हमारा उत्साहवर्धन हो। हमारी अन्य रचनाओं के लिये हमारे ब्लॉग पर visit करें-
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Comments

  1. By श्वेता सिन्हा

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आपकी सराहना, आपके सुझाव और आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिये दुआओं की तरह है-नैमतों की तरह है। आपसे वार्तालाप मेरे लिये सौभाग्य का विषय है। कृपया अपने शाब्दिक उद्गार comment box में अवश्य ही व्यक्त करें। प्रतीक्षा में-अमित 'मौलिक'

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